गोरखपुर: कहते हैं कि प्यार और जंग में सब जायज है, लेकिन गोरखपुर के लोगों ने साबित कर दिया है कि इसमें ‘जुबां केसरी’ को भी जोड़ देना चाहिए। गोरखपुर में अभी एक चमचमाता हुआ नया ओवरब्रिज जनता के लिए खुला ही था कि शहर के ‘पेंटिंग कलाकारों’ ने अपनी पिचकारियों से इसे ‘लाल किला’ बनाने की कसम खा ली। पुल का उद्घाटन हुए अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि दीवारों पर ऐसी नक्काशी की गई कि दूर से देखने पर लगे जैसे लोगों को थूकने का नया ठिकाना मिल गया हो।
उद्घाटन का रिबन कटा, और इधर ‘केसर’ बिखरा
जैसे ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने पुल का फीता काटकर इसे जनता को समर्पित किया, हमारे गोरखपुरिया भाईयों ने अपनी ‘खास किट’ (तंबाकू, चूना और सुपारी) के साथ तैनात थे। इधर पहली गाड़ी पुल पर चढ़ी, उधर पहली ‘पीक’ दीवार पर जड़ दी गई। ऐसा लगा जैसे पुल का नहीं, बल्कि शहर के थूक-रत्नों का असली ट्रायल शुरू हुआ हो।
इंजीनियरों ने महीनों लगाकर कंक्रीट को मजबूती दी, पेंटर्स ने दिन-रात एक करके सफेद और पीली पट्टियां बनाईं, लेकिन हमारे शौकीनों ने सिर्फ 10 रुपये के पाउच में उस पूरे बजट को ‘लाल’ कर दिया। अब आलम यह है कि जो पुल कल तक विकास की चमक बिखेर रहा था, आज वह ‘विमल’ की चमक से सराबोर है।
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विदेशी पर्यटकों को होगा भ्रम!
सोशल मीडिया पर लोग मजे ले रहे हैं कि अगर कोई विदेशी पर्यटक इस पुल से गुजरे, तो उसे लगेगा कि शायद यहाँ की दीवारों पर कोई ‘एब्सट्रैक्ट आर्ट’ (अमूर्त कला) की गई है। दीवारों के कोनों को देखकर ऐसा लगता है जैसे वे कोने नहीं, बल्कि तंबाकू प्रेमियों के लिए खास ‘टारगेट प्रैक्टिस ज़ोन’ हों। पुल की रैलिंग जो कभी चांदी जैसी चमक रही थी, अब वह भूरे-लाल रंग के ऐसे शेड में है जिसे शायद एशियन पेंट्स भी अपनी कैटलॉग में न ढूंढ पाए।
सीसीटीवी कैमरा बनाम ‘निशानेबाज’
प्रशासन ने जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कही थी, लेकिन हमारे कलाकारों का निशाना इतना सटीक है कि वे कैमरे की नजर से बचकर ठीक उसके नीचे ही अपना ‘सिग्नेचर’ छोड़ जाते हैं। लोगों का कहना है कि यह एक नई तरह की ‘सिविक सेंस’ है—पुल हमारा है, दीवार हमारी है, तो थूकने का अधिकार भी हमारा ही है!
सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
फेसबुक और instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर इस खबर के बाद मीम्स की सुनामी आ गई है। कोई कह रहा है, “गोरखपुर के लोग पुल को बस अपना मान रहे हैं, इसलिए अपना निशान छोड़ रहे हैं,” तो कोई लिख रहा है, “यह पुल का उद्घाटन नहीं, बल्कि थूकने की प्रतियोगिता का फाइनल था।” एक यूजर ने तो यहाँ तक लिख दिया कि “सरकार को चाहिए कि पुल पर पेंटिंग कराने के बजाय सीधे लाल रंग की टाइल्स ही लगवा दे, कम से कम गंदगी तो नहीं दिखेगी!”