​”साइकिल, संघर्ष और सत्ता, क्या वाकई आसान था Akhilesh Yadav के लिए ‘माननीय’ बनना?” पढ़े पूरी कहानी

Akhilesh Yadav story in hindi: 2,43,286 किमी वर्ग में फेला हुआ है एक एसा राज्य जिसकी सत्ता देश की राजनीति का रूझान तय करती है। हम बात कर रहे है 1 April 1937 में निर्मित हुए उत्तर प्रदेश की। वो उत्तर प्रदेश जिसकी भारतीय संविधान में 31 राज्य सभा सीटें, 80 लोक सभा सीटें और सबसे अधिक विधान सभा सीटें दर्ज हैं, जिनकी संख्या 403 है। प्रदेश में कई पार्टियों का दब-दबा बना रहता है।

सियासत के इस अखाड़े में कई सांसदों के नाम प्रसिद्ध है। जिनमें कल्याण सिंह जैसे नाम शामिल है। आज हम बात करेंगे समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र अखिलेश यादव की। जो प्रदेश में अपने काम के साथ-साथ विवादों के कारण भी चर्चाओं में रहते है। यादव जी प्रदेश के सबसे कम उम्र वालें सांसद है जिन्होनें मुख्यमंत्री का पद संभाला है।

साल था 2000 जब सिडनी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग कि पढ़ाई पुरी करके अखिलेश वापस भारत लौटें थे। उसी साल अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह यादव के नेत्रित्व में राजनीति में अपने कदम रखें। अखिलेश कि उम्र केवल 27 वर्ष थी जब उनका नाम पहली बार लोकसभा में सदस्य के रूप में जोड़ा गया था। उस वर्ष पिता मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज और मैनपुरी से लोकसभा का चुनाव लड़ा और अपनी जीत की परचम लहराया था। इसके बाद मुलायम सिंह यादव के द्वारा कन्नौज की सीट को खाली कर दिया गया था और फिर उपचुनाव में वहां से अखिलेश यादव को टिकट मिला।

साल 2009 में अखिलेश यादव ने भी दो क्षेत्रों से चुनाव लड़े थे। कुल 1,15,864 वोटों के साथ एक बार फिर से उन्होनें कन्नोज पर विजय प्राप्त की। साथ ही दूसरी फिरोजाबाद की सीट यादव ने अपनी पत्नी के लिए खाली कर दी थी। लेकिन इस बार से तरकीब काम नहीं आई। स्टार और कांग्रेस के उम्मीदवार राज बब्बर ने 67,301 वोट के साथ अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को हरा दिया।

अब अगला पड़ाव था 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव। जिस कारण से यादव ने कन्नोज की सीट से इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ा। इस चुनाव में अखिलेश को जनता का खूब सारा प्यार मिला और 22,090,571 वोटों के साथ यादव ने कुल 97 सीटों को समाजवादी पार्टी के नाम किया। 2012 यूपी चुनाव के बाद अखिलेश सूबे के 20वें मुख्यमंत्री बने थे।