चीन की बढ़ती ताकत देख ,अमेरिका घबराया भारत के सामनें रखा यें बड़ा प्रस्ताव

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India America Frienship

भारत और अमेरिका के संबंध पिछले कुछ वर्षों से काफी अच्छी चल रही है रक्षा व्यापार (Defense trade) संयुक्त अभ्यास (joint practice)और समुद्री सुरक्षा (maritime security) में सहयोग के साथ भारत और अमेरिका के बीच में रक्षा संबंध एक प्रमुख स्तंभ के तौर पर उभरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी अमेरिका में राष्ट्रपति “जो बाइडन (Joe Biden)” के नेतृत्व में गठित होने वाली एक नई सरकार के साथ और भी अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। जब डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trumph) राष्ट्रपति थे, तब भी रिश्ते बहुत मजबूत थे और अब भी उम्मीद है कि नई सरकार आने से रिश्ते और मजबूत होंगे ।

दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध लगातार मजबूत एवं गहरे होंगे। दोनों देशों में राजनीतिक प्रतिबद्धताएंश्र (Commitments) मजबूत होंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों ही देश भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बढ़ती चीनी नीती (Policy)के बारे में चिंतित हैं।
अमेरिका के एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन (Think Tank Brookings Institution) की ओर से किए गए हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है। ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन वाशिंगटन डीसी (Brookings Institution Washington DC) स्थित एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक नीति संगठन पब्लिक पॉलिसी ऑर्गेनाइजेशन (Public Policy Organization) है।

अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक (Think Tank)एवं शोध संस्थान ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन (Brookings Institution)ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है, भारत के साथ अमेरिकी रक्षा और सुरक्षा संबंध बाइडन प्रशासन (Biden administration) के व्यापक इंडो-पैसिफिक एजेंडे का एक छोटा सा, मगर महत्वपूर्ण भाग है, जिसे प्रमुख पुनर्रचना (Re-design) के बजाय स्थिर निवेश और पुनर्गणना की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि रणनीतिक साझेदारी के हिस्से के रूप में, भारत अमेरिका के साथ किसी अन्य देश की तुलना में अधिक द्विपक्षीय (Bilateral) अभ्यास करता है। उदारण के लिए कुछ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय अभ्यास हैं : युद्ध अभ्यास (War practice), वज्र प्रहार (thunderbolt), तरकश (quiver), टाइगर ट्रायम्फ (tiger triumph) और कोप इंडिया (coop India)।भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, आतंकवाद निरोधक अभ्यास के साथ फरवरी में दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यास के लिए जा रही हैं।

भारत का अमेरिका से रक्षा संबंधी अधिग्रहण का कुल मूल्य 15 अरब डॉलर से अधिक है। भारत-अमेरिका रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (Defence Trade and Technology Initiative) का उद्देश्य सह-विकास और सह-उत्पादन प्रयासों को बढ़ावा देना है।जून 2016 में अमेरिका ने भारत को एक ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ (Major defense partner) के रूप में मान्यता दी, जो अमेरिका को अपने सबसे करीबी सहयोगियों और साझेदारों के साथ ही भारत को प्रौद्योगिकी साझा करने की सुविधा प्रदान करता है। वहीं सितंबर 2018 और दिसंबर 2019 में भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय संवाद (Two plus two ministerial dialogue)के दौरान रक्षा सहयोग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय संवादों के अलावा रक्षा सहयोग पर कुछ अन्य महत्वपूर्ण संवाद तंत्र भी स्थापित हैं। इनमें रक्षा नीति समूह (Defense Policy Group, सैन्य सहयोग समूह (Military Cooperation Group),रक्षा प्रौद्योगिकी (Defense Technology) और व्यापार पहल(Trade Initiative) और इसके संयुक्त कार्यदल (Joint Task Force),सेना (Army),नौसेना (Navy)और वायुसेना (Air Force), रक्षा के लिए कार्यकारी संचालन समूह खरीद एवं उत्पादन समूह, वरिष्ठ प्रौद्योगिकी सुरक्षा समूह और संयुक्त तकनीकी समूह शामिल हैं।

दोनों देशों के बीच रिश्ता काफी मजबूत हो चुका है और भारत व अमेरिका के बीच व्यापक (Comprehensive),लचीली (flexible)और बहुआयामी रक्षा (multi-functional defense)साझेदारी भी बन चुकी है।दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए बेसिक एक्सचेंज एंड को-ऑपरेशन एग्रीमेंट (बीईसीए)- Operation Agreement (BECA) पर हस्ताक्षर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दोनों देशों की नौ सेनाओं के बीच समुद्री सूचना साझाकरण और समुद्री डोमेन (Maritime domain) जागरूकता को बढ़ाएगा।

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