बतातें की बंगाल में जब -जब चुनाव नजदीक आता तब – तब आग की निंगरीरों में तपदिल हो जाता है बंगाल का चुनाव साथ मे बतातें चलें कि बंगाल में चुनाव नजदीक आ गया है। वही चुनाव आयोग ने तारीख का ऐलान भी कर दिया और तारीख तय होतें ही राजनेताओं ने अपनी – अपनी रोटियां भी सेंकना चालू कर दिया कोई हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहा है तो कोई चुनाव आयोग पर एक तरफा करने आरोप लगाया जा रहा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रदेश कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा के लिहाजे केंद्रीय बल का मांग किया था जिसे चुनाव आयोग ने स्तिथि को देखते हुए 40 कंपनिया तैनात कर दिया था। लेकिन आपको बता दे की राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एक हजार केंद्रीय बल सुरक्षाकर्मियों को मुस्तैद करने का आदेश दिया साथ ही बतातें चलें कि बीजेपी के प्रदेश कार्यकर्ताओ में मुख्य चुनाव आयुक्त से मिल कर टीएमसी कार्यकर्ताओं पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा हमारे कार्यकर्ताओं जान मार की धमकियां दी जा रही हैं। वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा हमे ठोस कदम उठाने पर मजबूर न करें पार्टियां।

और आपको बता दें की बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी आरिज आफताब से मुलाकात कर शिकायत की है कि सरकार केंद्रीय बलों को ऐसे तरीके से तैनात कर रही है कि सत्तारुढ़ पार्टी के हितों को फायदा हो. इन जवानों को संवेदनशील और हिंसाग्रस्त इलाकों में नहीं भेजा जा रहा है. इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए.

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं राज्य में ऐसा माहौल बनाना जरूरी है कि लोग निडर होकर मतदान के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकें. इसके लिए केंद्रीय बलों की तैनाती बेहद अहम है

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