अभिषेक कुमार, नई दिल्लीः देश में ऐसे बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो किन्ही वजहों से अपने मां बाप से बिछड़ जाते हैं एवं उन्हें तलाशने में काफ़ी जोखिम होती है और कभी कभी तो कुछ के मां बाप मिल ही नहीं पाते ऐसे में ये बच्चे मां बाप के होते हुए भी अनाथालयों में जिंदगी बिताने को मजबूर हो जाते हैं।

इस समस्या का समाधान करने की कोशिश करते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority Of India) ने बड़ा कदम उठाया है। अपना पता ना बता पाने वाले बच्चों के लिए विशिष्ट पहचान प्राधिकार अनाथालयों में विशेष शिविर लगाएगा जहां इन बच्चों के आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी की जायेगी। इससे पांच साल से अधिक आयु के जिन बच्चों का आधार कार्ड उनके माता पिता ने पहले बनवाया होगा, उनके फिंगर प्रिंट ( Finger Print) का मिलान होते ही उनके घर का पता चल जायेगा।आपको बता दें की कानपुर प्राधिकरण इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू कर रहा है। इसके बाद प्रदेश के सभी अनाथालयों और बिछड़े बच्चों को लेकर काम करने वाले एनजीओ (NGO) से संपर्क कर अपनी टीमें वहां भेजेगा।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण नवजात का भी आधार बनाता है,लेकिन 5 साल की उम्र तक फिंगर प्रिंट में बदलाव आ जाते हैं, जो की, 15 वर्ष की आयु तक समान रहते हैं, ऐसे में बच्चे का पांच साल की आयु में पहली बार और फिर किशोर होते ही दूसरी बार आयु में आधार अपडेट किया जाता है। पांच साल से अधिक आयु वाले बच्चों का आधार बनाकर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण उनके पहले बनाए गए आधार का पता लगाएगा। यदि पांच साल से अधिक आयु होने पर बिछड़े बच्चों का आधार कार्ड बना होगा तो प्राधिकरण का सिस्टम पुराने बने आधार की जानकारी दे देगा।

इसलिए आधार अपडेट कर रहा प्राधिकरण :
बच्चों को आयु 5 साल और 15 पूरी होने पर उनका बायोमेट्रिक अपडेट जरूर करना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर बच्चे का आधार कार्ड इनैक्टिव हो जाता है। इन दिनों 15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को कोरोना रोधी वैक्सीन लग रही है। प्राधिकरण अस्पतालों और स्कूलों में शिविर लगाकर वैक्सीन लगवाने वाले 15 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का आधार अपडेट कर रहा है। उत्तर प्रदेश में 10,636 से अधिक आधार किट काम कर रही हैं।