असम की 23 साल की Mary kom के बाद ओलंपिक मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय बॉक्सर बनी लवलीना बोर्गेहेन। मेरी कॉम ने लंदन में 2012 ओलंपिक में ब्रोन्ज़ मेडल जीता था और 2008 में विजेन्द्र सिंह ने, उनके बाद शोपीस में मेडल जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज़ बनी लवलीना।
लवलीना दो बार विश्व चैंपियनशिप की ब्रोन्ज मेडल विजेता रह चुकी हैं और वह असम की पहली महिला मुक्केबाज़ हैं जिनेहोंने खेलों के लिए क्वालीफाई किया है।


असम के गोलाघाट जिले के बोरमुखिया गांव की रहने वाली लवलीना ने जर्मनी की नादिन एपेटिज को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था।
बता दें कि बॉक्सर की बदौलत उनके गांव के लोगों को आखिरकार उनके इलाके में एक मोटर योग्य सड़क का निर्माण होते दिखाई देगा।


लवलीना का जन्म 2 अक्टूबर 1997 को हुआ था, उनेहोंने अपनी बड़ी जुड़वा बहनों लीचा और लीमा से प्रेरणा ली, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर किकबॉक्सिंग की है, उनके नक्शेकदम पर चलते हुए लवलीना ने 13 साल की उम्र में Muay Thai को अपनाया लेकिन बाद में बॉक्सिंग की लाइन में आ गईं।
अपने प्राथमिक विद्दालय, (Barpathar Girls High School) में भारतीय खेल प्राधीकरण (SAI) के परीक्षण के दौरान, प्रसिद्ध भारतीय मुक्केबाज़ी कोच पदुम बोरो ने लवलीना को देखा।


उनके इलाके के लाोगों ने उनके माता-पिता पर यह कह की दया की थी कि उनका कोई बेटा नहीं है। लेकिन अब उनकी बेटी के पास ओलंपिक पदक है।
अधिनियम की बात के रुप में भारत की तीनों मेडल विजेता महिलाएं हैं, सैखोम मीराबाई चानू ने Women`s Weightlifting category में सिल्वर मेडल जीता, बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने ब्रॉन्ज मेडल जीता और अब लवलीना ने भी बॉक्सिंग में एक और ब्रोन्ज मेडल जीता।

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