Children’s Day Celebrate: आज 14 नवंबर है, साल 1889 में आज ही के दिन हमारे देश के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था, जिन्हें हम प्यार से चाचा नेहरू भी कहते है.. पंडित नेहरू ने भारत की आजादी के एक दिन पहले यानी 14 अगस्त 1947 की आधी रात को संसद में भारतीय संविधान सभा में “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी” नाम का एक अंग्रेजी भाषा में भाषण दिया था। ये स्पीच भारत पर ब्रिटिश शासन के अंत को दर्शाती है.. इसकी पहली लाइन थी “Long years ago we made a tryst with destiny, and now the time comes when we shall redeem our pledge, not wholly or in full measure, but very substantially. At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom. जिसका हिन्दी अनुवाद है।

Children’s Day Celebrate:

“बहुत साल पहले हमने नियति के साथ एक प्रतिज्ञा की थी, और अब समय आता है जब हम अपनी प्रतिज्ञा को पूरी तरह से या पूर्ण रूप से नहीं, बल्कि बहुत हद तक पूरा करेंगे। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही है, भारत जगा है जीवन और स्वतंत्रता के लिए। इस भषण के बाद हमारे देश ने आजादी की खुशबू महसूस की थी। हर भारत वासी के लिए ये देश एक खुला आसमान बन गया था, जिस पर कोई ब्रिटिश अत्याचार नहीं था, किसी तरह का नियंत्रण नहीं था, पर केवल एक गम जरूर था, बटवारे का गम और अपनों से दुर होने का दर्द।

जिसके बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू को हमारे देश के पहले प्रधान मंत्री का पद सौंपा गया, एक ऐसा कर्तव्य जिसके लिए और किसी पर भी पुरा विश्वास नहीं था। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पंडित जवाहर लाल नेहरू की दो बहने थी। विजया लक्ष्मी पंडित, एक भारतीय राजनयिक और राजनीतिज्ञ थीं। जिन्हें 1962 से 1964 तक महाराष्ट्र की छठी गवर्नर की सीट सौंपी गई और 1953 से 1954 तक इन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी United Nations General Assembly की 8वीं प्रेसीडेंट की पोस्ट पर न्युक्त किया गया।

बता दें, ये दोनों ही पदों पर नियुक्त होने वाली पहली महिला भी बनी। वहीं, पंडित जवाहर लाल नेहरू की दुसरी बहन कृष्णा नेहरू हुथीसिंग थी। जो देश की एक जानी मानी लेखक थी। बहन की ही तरह हमारे चाचा नहरू को भी लिखना बेहद पंसद था। उनके द्वारा लिखी गई कई फैमस बुक्स में The Discovery of India, Glimpses of World History और 1935 में, उन्होंने जेल में अपनी ऑटोबायोग्रैफी लिखी, जिसका नाम था Toward Freedom। एक समय ऐसा था जब पंडित जवाहर लाल नेहरू इलाहाबाद जिसे अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है, वहां की एक जेल में बंद थे। और इनकी बेटी इंदिरा गांधी महज 10 साल की थी।

उस समय वो मसूरी में रहती थी। उस समय चाचा नहरू ने अपनी बेटी को कई पत्र लिखे और ऐसे ही 30 चिट्ठियों को मिलाकर एक किताब बनाई गई जिसे Letters from a Father to his Daughter का नाम दिया गया। इन लैटर्स में एक पिता ने अपनी बेटी को कई ऐसी बाते बताई, कई ऐसी सीख दी जो पुर्व प्रधान मंत्री को उनकी जिंदगी ने उन्हें सिखाई। आपको एक और बात जानकर हैरानी होगी कि साल 1950-1955 के बीच में noble peace prize के लिए चाचा नहरू को 11 बार नामित किया गया लेकिन लेकिन उन्हें कभी भी नोबेल से एक भी पुरस्कार नहीं मिला। यहां तक की भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू 9 बार जेल गए। जिसका मतलब ये है कि उन्होनें अपनी जिंदगी के कुल 3259 दिन सलाखों के पीछे बिताए।

बता दें, भारतीय संविधान को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने ड्राफ्ट किया है लेकिन वो पंडित नेहरू थे जिन्होंने संविधान में अनुच्छेद 44 की शुरुआत की थी, जो भारत को एक secular state का दर्जा देता है। यहां तक की All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), the Indian Institutes of Technology (IITs), the Indian Institutes of Management (IIMs) and the National Institutes of Technology (NITs) को चाचा नहरू के लीडरशिप में शुरु किया गया था। पंडित नेहरू पर 4 बार घातक हमला हुआ।

सबसे पहले भारत के टुकड़े होने पर उन्हें मारने की कोशिश की गई थी। जिसके बाद 1955, 1956 और फिर 1961 में भी उनपर जानलेवा अटैक हुआ। हालांकि, 27 मई, 1964 को 74 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से पंडित नेहरू की मृत्यु हो गई। ये लोगों के इतने करीब और राष्ट्र के बीच इतने प्रसिद्ध थे कि लगभग 1.5 मिलियन उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उनके देह का अंत हुआ लेकिन उनका चरित्र, उनका स्वभाव और उनका किरदार हर भारतीय के जहन में आज भी जिंदा है। आज के दिन बच्चों के अधिकारों, देखभाल और शिक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे भारत में childrens day भी मनाया जाता है। और हमारे देश के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनके जन्मदिन पर श्रद्धांजलि दी जाती है।

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