नई दिल्ली: भारत की शान.. राष्ट्रगान। भारत की आजादी के जश्न में हम आपको कुछ खास बातें बाताते है जिससे आपको यह पता लगें कि आखिर राष्ट्रगान के लिए “जन गण मन” को ही क्यों चुने?

भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” सबसे पहले, 1911 में राष्ट्रकवि गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा लिखा गया था। इसे सबसे पहले आंध्र प्रदेश के एक छोटे से जिले मदनपिल्लै में गाया गया था। उन्होंने राष्ट्रगान को बंगाली में लिखा था और फिर कुछ समय बाद आबिद अली ने इसका हिंदी और उर्दू में रूपांतरण किया था। भारत के आजाद होने के बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान ने इसे देश का राष्ट्रगान घोषित किया था। यह बात कुछ ही लोग जानते है कि रविन्द्रनाथ टैगोर की यही रचना 1919 में अंग्रेजी अनुवाद के बाद “दि मॉर्निंग सांग ऑफ इंडिया” कहलाया था। टैगोर द्वारा लिखे गए राष्ट्रगान में पांच पार्ट हैं लेकिन राष्ट्रगान के रूप में हमनें इसके पहले पद को ही अपनाया है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने ही अपनी आजाद हिंद फौज में ‘जय हे’ नाम से इस गीत को गाया था।

आप राष्ट्रगान ऐसे ही कही पर नहीं गा सकते। इसके सम्मान के लिए भारतीय संविधान में कुछ नियम व कानून है। यदि आप राष्ट्रगान का अपमान करते है तो आप पर प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टु नेशनल ऑनर एक्ट-1971 की धारा-3 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही अपमान करने पर तीन साल की जेल और आप पर जुर्माना भी लगेगा। देशवासियों से यह उम्मीद की जाती है कि राष्ट्रगान के चलने पर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएं। राष्ट्रगान को गाने की अवधि 52 सेकेण्ड है।

बता दें, वदेंमातरम को भी राष्ट्रगान बनाने की बात कही जा रही थी लेकिन ऐसा किया नहीं गया। वदेंमातरम की शुरुआती चार लाइनें ही देश को समर्पित कि गई है, बाकी की लाइनें बंगाली भाषा में हैं और उसमें मां दुर्गा की स्तुति की गई है। किसी भी ऐसे गीत को राष्ट्रगान बनाना ठीक नहीं है, जिसमें देश की बात न होकर किसी देवी-देवता की बात करी जाएं। इसलिए वंदे मातरम को राष्ट्रगान का दर्जा ना देकर राष्ट्रगीत घोषित किया।

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