Up Election 2022: यूपी के अधिकारी शिवपाल यादव को क्यों कहते थे कार्यवाही मिनिस्टर, जानिए यूपी के चाचा की कहानी

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Shivpal Singh Yadav

नई दिल्ली: यूपी विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) के सियासी शतरंज में सारी पार्टियों के नेता अपने-अपने दांव चल रहे हैं। बीते दिन मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के बेटे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपने चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) से सारे द्वेष क्लेश मिटाकर चाचा भतीजे के इस रिश्ते की नई शुरुआत की है। अब ये चाचा भतीजे की जोड़ी विपक्षियों में कैसी हलचल मचाती है, ये देखने लायक होगा। आज हमारी इस खबर में हम आपको बताएंगे छोटे यादव जी के बारे में। बात करते हैं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता शिवपाल सिंह यादव की। Up Election 2022

शिवपाल सिंह यादव का जीवन परिचय Up Election 2022

शिवपाल सिंह यादव का जन्म 6 अप्रैल, 1955 को हुआ था। इनका जन्म स्थान इटावा जिले (Etawah District) का सैफई गांव (Village Saifai) है। इनके पिता का नाम सुघर सिंह यादव (Sughar Singh Yadav) और माता का नाम मूर्ति देवी (Murti Devi) था। सैफई और करहल (Karhal) से स्कूली शिक्षा लेने के बाद सिंह ने साल 1976 में केके पीजी कॉलेज (यूनिवर्सिटी ऑफ कानपुर) (K.K. PG College, University of Kanpur) से बी.ए. (B.A.) की डिग्री ली और फिर साल 1977 में लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज (यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ) (Lucknow Christian College, University of Lucknow) से बैचलर्स ऑफ फिजिकल एजुकेशन (B.PE) की डिग्री प्राप्त की। शिवपाल सिंह यादव का विवाह सन् 23 मई, 1981 को सरला यादव (Sarla Yadav) से हुआ। इनके दो बच्चे हैं। बेटे का नाम आदित्य यादव (Aditya Yadav) है और बेटी का नाम अनुभा यादव (Anubha Yadav)।

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (Pragatisheel Samajwadi Party) के निर्माण से पहले, सिंह का राजनीतिक सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। सिंह ने राजनीति अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव से सीखी है। जब शिवपाल स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे, उस समय तक इनके बड़े भाई मुलायम सिंह यादव राजनीतिज्ञ के रूप में चर्चित होना शुरू हो चुके थे। जब एक तरफ बड़े भाई क्षेत्र की राजनीति संभाल रहे थे, तब शिवपाल समाजवादी कार्य करने में व्यस्त थे। जैसे लोगों की मदद करना, मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, अन्याय के लिए लड़ना, गलत पर आवाज उठाना, ये सब उनकी जीवनशैली का हमेशा से ही हिस्सा रहा है।

शिवपाल सिंह यादव का सियासी सफर:


साल 1988 में शिवपाल ने औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रखा। जब वो जिला सहकारी बैंक, इटावा के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1991 और 1993 में भी वो यहां के अध्यक्ष चुने गए। फिर 1994 से 1998 तक उनके पास उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के अध्यक्ष की जिम्मेदारी रही। साथ ही 1995 से 1996 तक सिंह ने इटावा क्षेत्र के जिला पंचायत अध्यक्ष (Zilla Panchayat President) का दायित्व भी संभाला। इसके बाद उन्हें उत्तरप्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक का अध्यक्ष बनाया गया।

अब समय था 13वीं विधानसभा का। जब सिंह ने जसवंतनगर (Jaswantnagar) से चुनाव लड़ा और जीत का परचम लहराया। उनकी इस अपार लोकप्रियता और मेहनत को देखते हुए शिवपाल सिंह को समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव (State General Secretary) का पद सौंपा गया। उन्होंने पार्टी के विकास में अहम भूमिका निभाई है। इनके कारण समाजवादी पार्टी को प्रदेश में ऐसा स्थान मिला था, जो इससे पहले किसी भी पार्टी ने प्राप्त नहीं किया था।

साल बदला, समय बदला, और बदली तो कई स्थानों की अध्यक्षता। जो सीधा सिंह की झोली में आती रही। प्रदेशवासियों को जितनी बार भी किसी दिक्कत का सामना करना पड़ा, तो सिंह उस समय ढाल बनकर सामने खड़े रहे। उनकी कई बार गिरफ्तारी हुई लेकिन वो अपने दृढ़ निश्चय से पीछे नहीं हटे। सिंह ने मई 2009 तक प्रदेश अध्यक्षता संभाली। फिर उन्हें यूपी विधानसभा में नेता विरोधी दल (Opposition Party) की जिम्मेदारी दे दी गई। वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) की वापसी के दिन उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने में बिल्कुल भी देर नहीं की। जिससे ये पता चलता है कि उन्हें पद से ज्यादा अपनी जिम्मेदारियां जरूरी लगती हैं।

इसके बाद समय आया 16वें विधानसभा चुनाव का। जिसमें 60% से ज्यादा वोट समाजवादी पार्टी को मिले। यकीन मानिए ये ऐसे पहले विधायक रहे है, जिनकी पार्टी में होने से पार्टी को इतनी अपार बहुमत मिली हो। अपनी विधायकी के अब तक के अंतराल में शिवपाल ने कई किताबें बाटी हैं। जिससे प्रदेश में पढ़ाई का विकास हो सके। साथ ही शिवपाल यादव के कई लेख बहुचर्चित अखबारों में प्रकाशित हुए। जिससे ये पता चलता है कि उनकी साहित्य में कितनी रुचि है।

साल 2012 में समाजवादी पार्टी की फिर से सरकार बनने के बाद, शिवपाल यादव ने भ्रष्टाचार को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी। कई विभागों के अधिकारी इन्हें “कार्यवाही मिनिस्टर” कहते थे। इनके सिद्धांतों कि इन्होंने हमेशा रक्षा की है।

बनाई अपनी अलग समाजवादी पार्टी:


अब ये वो समय था जब अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी का एक अहम चेहरा बन रहे थे। जिस कारण से शिवपाल यादव का पार्टी में स्थान गिरता हुआ दिख रहा था। साल 2017 में शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी थी। साथ ही ये ऐलान किया था कि वो नई पार्टी का निर्माण करेंगे। जो जनता के लिए काम करेगी।

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फिर 29 अगस्त 2018 को शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी नाम का एक संगठन का निर्माण किया। इस पर सिंह ने कहा था कि उन्होंने ये पार्टी इसलिए बनाई है ताकि वो समाजवादी सिद्धांतों को जिंदा रख सकें। आपको बता दें इस पार्टी का कार्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Lucknow, Uttar Pradesh) में है। वहीं इस पार्टी का चुनाव चिन्ह “चाबी” है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी कमजोर वर्गों के लोगों के लिए कार्य करती है। प्रदेश में एक अहम पार्टी के रूप में देखी जा सकती है।

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