SHASTRI JAYANTI 2021: श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की अकस्मात मौत हुई या मर्डर?

शास्त्री जी ने 54 साल पहले इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन आजतक हमें ये नही पता चला कि उनका देहांत कैसे हुआ। तो चलिए हम आपको बताते हैं कब, कहां और कैसे लाल बहादुर शास्त्री जी के निधन की खबर आई।

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योगिता लढ़ा, नई दिल्ली। लाल बहादुर शास्त्री जी एक ऐसे व्यक्तित्व जिनको याद करते ही देशप्रेम और जय जवान जय किसान जैसे शब्द हमारे जेहन में आते हैं।  लेकिन आप सब में से कुछ ही होंगे जिनको शास्त्री जी के जीवन के बारे में शायद थोड़ा ज्यादा पता होगा और आपने इन शब्दों के साथ-साथ ताशकंद नामक एक जगह को भी याद किया होगा। ताशकंद से जुड़ी है हमारे देश के दूसरे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु की रहस्य भरी कहानी। यू तो आज हमारे देश भारत को आजाद हुए 75 साल हो गए लेकिन आज भी गरीबी से, भूखमरी से, न्यायीक प्रक्रियों से हमारा देश आजाद नहीं हुआ हैं। शास्त्री जी ने 54 साल पहले इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन आजतक हमें ये नही पता चला कि उनका देहांत कैसे हुआ। तो चलिए हम आपको बताते हैं कब, कहां और कैसे लाल बहादुर शास्त्री जी के निधन की खबर आई।

अब कहानी को शुरू से शुरू करते है, साल था 1966, दिन 10 जनवरी का और जगह ताशकंद। उस दिन हमारे देश के दूसरे प्रधानमंत्री 1965 की जंग को खत्म करने के लिए शांति समझौता पत्र लेकर ताशकंद गये हुए थे।पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति अयूब खान भी वहां आए थे। 10 जनवरी को दोनों देशों ने शांति समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे। तारीख बदल चुकी थी और दिन था 10 से 11 जनवरी। समझौते को 12 घंटे हो चुके थे रात को करीब 1 बज के 20 मिनट पर अचानक वहां के होटल में अफरा तफरी मच गई और 1 बज कर 32 मिनट पर ये खबर आई की हमारे देश के प्रधानमंत्री का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

हमारे देश के लिए बहुत बड़ी छती थी। जहा एक तरफ भारतवासी शोक मना रहे थे, वही दूसरी तरफ प्रधानमंत्री की मौत के रहस्य को दफनाया  जा रहा था। कुछ लोग दावा करते हैं कि जिस रात शास्त्री की मौत हुई, उस रात खाना उनके निजी सहायक रामनाथ ने नहीं बनाया था। उसके स्थान पर Jan mohd ने रसोई घर में काम किया था जो सोवियत रूस में भारतीय राजदूत TN kaul के कुक भी थे।

मौत के बाद शरीर के नीला पड़ने पर लोगों ने आशंका जताई थी कि शायद उनके खाने में जहर मिला दिया गया था। साथ ही शास्त्री जी की पत्नी ने ये आरोप लगाया की उनके पति और देश के प्रधानमंत्री को जहर दे कर मारा गया हैं। यह बात भी सच है कि शास्त्री जी को हृदय संबंधी बीमारी भी और 1959 में एक बार दिल का दौरा भी पड़ा था। लेकिन कहते है न की सच ज्यादा दिनों तक छुप नहीं सकता और हुआ भी कुछ ऐसा ही। उनके मरने के 52 साल बाद रोहित चौधरी नामक एक युवक ने आरटीआई फाइल कर शास्त्री जी के मौत का कारण जानना चाहा।

इस आरटीआई ने मानो सारे राज ऐसे खोले जैसे ये आरटीआई नहीं बल्कि अली बाबा चालिस चोर वाली गुफा हो जिसका पासवर्ड 52 साल बाद किसी रोहित के हाथों लग गया हो। इस रिपोर्ट में ये पाया गया की मरने से एक घंटे पहले प्रधानमंत्री बिलकुल ठिक थे। जो भी खेल चला वो महज 10 से 20 मिनट के अंदर खत्म हो गया।ये जान कर आपको आश्चर्य होगा की हमारे देश के प्रधानमंत्री की मृत्यु के बाद उनकी डेड बॉडी का पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया था। शास्त्री जी के पोते ने कई बार ये सरकार से मांग की है की उनकी मौत के कारण को सार्वजनिक किया जाए। लेकिन आज तक हम सही तरीके से नहीं जान पाए शास्त्री जी के मौत का कारण क्या था?

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