Sita Kund: इस जगह सीता माता ने किया था अग्नि में प्रवेश, क्या हैं सीता कुंड के ‘गर्म पानी’ का रहस्य?

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Sita Kund ki kahani: बिहार के मुंगेर का प्राचीन (पुराना) नाम ‘मुद्गलपुरी’ है, यहां रामायण काल से जुड़े कई स्थल आज भी मौजूद हैं। जिन स्थलों में से एक है सीताकुंड जिसके बारे में माना जाता है कि यहां माता सीता ने अग्नि में प्रवेश किया था और यहीं बाद में गर्म जलधारा का कुंड बन गया। सीताकुंड रामतीर्थ के नाम से भी जाना जाता है इसका वर्णन आनंद रामायण में मिलता है।

सीताकुंड बिहार में पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यता से जुड़े होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और सीताकुंड के गर्म जल में स्नान कर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं यहां एक माह तक चलने वाला माघी मेला का भी आयोजन होता है।

क्या है गर्म पानी का रहस्य?

मुंगेर के सीताकुंड को लेकर माना जाता है कि जब भगवान श्री राम ने सीता हरण से पहले माता सीता को अग्नि देव को सौंप दिया था और माता सीता कि जगह उनकी छाया प्रकट हुई थी। इसलिए असली माता सीता को अग्नि देव से पुनः पाने के लिए माता सीता ने अग्नि में प्रवेश किया था। जिसके बाद प्रज्ज्वलित अग्नि गर्म जल में परिवर्तित हो गई थी। इस कारण से सीताकुंड का जल हमेशा गर्म रहता है और सीताकुंड के अलावा भगवान राम समेत चारों भाइयों के नाम पर बनाए गए कुंड का पानी हमेशा शीतल रहता है।

समय-समय पर वैज्ञानिकों ने की शोध

सीताकुंड के जल की जांच समय-समय पर वैज्ञानिकों ने भी कि लेकिन विज्ञान को आज तक पता नहीं चल सका कि सीताकुंड का जल इतना गर्म क्यों रहता है। बताया जाता है कि इस कुंड की लंबाई और चौड़ाई 20 फीट है जबकि कुंड 12 फीट गहरा है। अंग्रेज पर्यटक टाइफेन्थलर ने 1765 सीताकुंड के जल का परीक्षण करने के बाद कहा था कि यहां का जल आठ महीने तक शुद्ध रहता है। उन्होंने बताया था ग्रीष्म ऋतु में यहां के जल का तापमान कम हो जाता है।