Ramayan: कौन थी रामायण में ताड़का? जिसके वध के लिए विश्वामित्र ने राजा दशरथ से मांगे थे श्री राम और लक्ष्मण

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Ramayan: महर्षि विश्वामित्र एक दिन अयोध्या नरेश दशरथ के महल आएं थे, उन्होंने राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने के लिए राजा से आज्ञा मांगी, जिससे कि असुर व राक्षसों से यज्ञ-अनुष्ठान की रक्षा कर सकें। राजा दशरथ के चारों पुत्र राम, भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण की शिक्षा पूरी हो जाने पर सभी गुरु वशिष्ठ के आश्रम से वापस महल को लौट आएं फिर एक दिन अचानक महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के महल आते हैं और विश्वामित्र राजा से राम और लक्ष्मण को मांगते हैं। आश्रम पहुंचकर विश्वामित्र ने श्री राम को राक्षसी ताड़का के बारे में बताया कि वह उसके यज्ञ में बाधा डालती है इसलिए उसका विनाश करना जरूरी है।

कौन थी ताड़का

एक सुकेतु नाम के राजा थे लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं थी इसके लिए उन्होंने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की और उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्म देव ने दर्शन दिए सुकेतु ने ब्रह्मा जी से अत्यंत बलवान संतान प्राप्ति का वरदान मांगा इसके बाद ब्रह्मा जी के इच्छास्वरूप सुकेतु को अत्यंत बलशाली पुत्री की प्राप्ति हुई, जिसका नाम सुकेतु ने ताड़का रखा था। कहा जाता है कि ताड़का में हजार हाथियों से समान बल था. बलशाली होने के साथ ही ताड़का बेहद सुंदर भी थी ताड़का का विवाह सुंद नाम के एक राक्षस से किया गया था विवाह के बाद ताड़का ने दो पुत्रों को जन्म दिया जिसका नाम सुबाहु और मारीच था।

कैसे हुआ ताड़का वध

श्री राम और लक्ष्मण जी दोनों विश्वामित्र के आश्रम की सुरक्षा करते हैं। एक दिन ताड़का के पुत्र सुबाहु और मारीच ऋषियों पर आक्रमण करने और यज्ञ में बाधा डालने के लिए आते हैं, तभी राम और लक्ष्मण अपने धनुष बाण से उनपर आक्रमण कर देते हैं। श्रीराम के धनुष बाणों से सुबाहु की मृत्यु हो जाती है और मारीच घायल हो जाता है।

अपने पुत्रों की ऐसी दशा देख ताड़का भी बेहद क्रोधित हो जाती है तब विश्वामित्र राम को ताड़का का वध करने के लिए कहते हैं पहले तो श्रीराम स्त्री हत्या करने के लिए हिचकिचाते हैं, क्योंकि धर्म उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देता लेकिन महर्षि विश्वामित्र का आदेश पाकर वो ऐसा करने के लिए मान जाते हैं, इसके बाद भगवान श्री राम एक ही बाण से ताड़का का वध कर देते हैं।