Khatu Shyam Story: कहां पर मिला था बाबा खाटू श्याम का शीश, जानें क्या हैं श्याम बाबा कि कथा…

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Khatu Shyam Story: भगवान खाटू श्याम को कलयुग में श्री कृष्ण के श्याम नाम से ही जाना जाता है। उनकी पूजा से भक्तों के जीवन का सभी कष्ट समाप्त हो जाता है। यही वजह है कि उन्हें ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, बर्बरीक अपनी मां का आशीर्वाद लेकर और उन्हें हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन देकर महाभारत युद्ध में हिस्सा लेने पहुंचे थे।

भगवान कृष्ण ने दान में मांगा शीश

भगवान कृष्ण को उनके आने के बाद युद्ध के अंत की अनुभूति हुई कि अगर कौरव हारते हैं, तो अपनी मां को दिए हुए वचन के चलते बर्बरीक उनका साथ अवश्य देंगे, जिससे पांडवों की हार तय है। इसी कारणवश श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का वेष धारण कर बर्बरीक से शीश का दान मांगा, लेकिन बर्बरीक सोच में पड़ गए आखिर ब्राह्मण को उनका शीश क्यों चाहिए? तब श्री कृष्ण ने उन्हें अपने विराट रूप के दर्शन दिए। इसके बाद बर्बरीक ने उनसे अंत तक महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा जताई और श्री कृष्ण ने उनकी यह बात स्वीकार कर ली और उनका सिर सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया।

कौन हैं बाबा श्याम?

बर्बरीक जिन्हें आज खाटू श्याम नाम से जाना जाता है वे शक्तिशाली पांडव भीम के पोते और घटोत्कच्छ के पुत्र हैं। बाबा श्याम का संबंध महाभारत काल से है। बर्बरीक के अंदर अपार शक्ति और क्षमता थी, जिससे प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था।

कहां प्राप्त हुआ था बाबा खाटू श्याम का शीश?

ऐसा कहा जाता है कि खाटू श्याम का शीश राजस्थान के सीकर से प्राप्त हुआ था। उनका शीश प्राप्त होने के बाद लोगों ने उस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया और कार्तिक महीने की एकादशी तिथि को उनका शीश उसी मंदिर में स्थापित कर दिया गया। तभी से भक्त इस दिन बाबा श्याम का जन्मदिन बड़ी जोरो शोरो से से बनाते हैं।

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