क्या आप जानते हैं सोने कि लंका से जुड़ा ये रोचक तथ्य? माता पार्वती ने दिया था लंका दहन का श्राप

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भगवान शिव के परम भक्त रावण को यदि कोई जानता है तो सोने की लंका से उसका नाम जरूर जोड़ता है। पर क्या आप जानते हैं कि रावण जिस सोने की लंका में रहा करता था। वो रावण को कैसे मिली थी? या उसने खुद उसे बनवाया था? यदि नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इससे जुड़ा रोचक तथ्य और पौराणिक कथाएं इस बारे में क्या बताती हैं।

किसने बनवाई थी सोने की लंका?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार रामायण (Ramayana) काल में सोने की लंका थी। सोने की लंका भगवान शिव और माता पार्वती की थी। भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए सोने की लंका बनवाई थी। माता पार्वती और भगवान शिव हिमालय पर निवास करके बहुत ही सामान्य जीवन जीते थे। पर एक बार दोनों ही जब बैकुंठ धाम पर भ्रमण के लिए निकले थे तो माता पार्वती ने देवताओं की तरह उनके पास भी एक महल होने की इच्छा जताई थी। तब भगवान शिव ने विश्वकर्मा और कुबेर को बुलाकर समुद्र के बीच सोने का महल बनवाया। जिसका नाम सोने की लंका पड़ा। सोने का ये महल पार्वती जी को बहुत प्रिय था।

रावण को कैसे मिली सोने की लंका?

रावण के पास सोने की लंका कैसे आई? इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है। मान्यताओं के अनुसार रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। सोने की लंका की सुंदरता की चर्चा दूर-दूर तक थी। एक बार जब रावण लंका के पास से गुजर रहा था तो उसने सोने कि लंका देखी।

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लंका कि भव्यता और सुंदरता को देखकर उसके मन में लालच आ गया। जिसके बाद उसने भगवान भोले नाथ की तपस्या करके वरदान में सोने की लंका ही मांग ली थी और भला ऐसा कैसे हो सकता है कि भगवान शिव से उनका भक्त कुछ मांगे और वह उसे न मिले। इसके बाद भगवान शिव ने अपनी सोने की लंका रावण को वरदान में दे दी।

श्राप के कारण हुआ था लंका दहन

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब रावण ने सोने की लंका वरदान में मांग ली तो ऐसे में माता पार्वती को क्रोध आ गया था। माता पार्वती जानती थीं कि शिवजी अब रावण से लंका वापस नहीं लेंगे, इसलिए उन्होंने क्रोधित होकर रावण को लंका के भस्म हो जाने का श्राप दे दिया था। जैसा कि हम सब जानते हैं रामायण में हनुमान जी ने अपनी पूछ से पूरी लंका का दहन कर दिया था।