अब टाटा का हुआ AirIndia, जानिए कुछ मुख्य हाईलाईट्स…

समूह द्वारा रखी गई बोली को मंजूरी देने वाली केंद्र सरकार के साथ 68 साल के अंतराल के बाद एयर इंडिया टाटा संस के पास वापस जाएगी। टाटा समूह ने स्पाइसजेट के अजय सिंह के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम की बोली लगाई है।

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air india privitization
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गुरुत्व राजपूत, नई दिल्ली: टाटा संस को फिर से एक बार AirIndia का नियंत्रण मिल गया है। आपको बता दें कि टाटा को अपने राष्ट्रीकरण 70 साल के बाद यह नियंत्रण मिला है। टाटा को सरकार ने विजेता बोलीदाता के रूप में चुना। दरअसल AirIndia पर काफी ज्यादा कर्ज है। टाटा को सरकार ने एयरइंडिया को 18,000 करोड़ रुपये में बेचा है।

कुछ मुख्य बातें इस निजीकरण की:

  1. बोली के लिए आरक्षित मूल्य 12,906 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था।
  2. प्रतिदिन 20 करोड़ रुपये का वर्तमान घाटा अब टाटा समूह का वित्तीय विचार होगा।
  3. 31 अगस्त, 2021 तक एयर इंडिया का कुल कर्ज 61,562 करोड़ रुपये है। विजेता बोली लगाने वाला 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज लेगा।
  4. एयर इंडिया में कुल 12,085 कर्मचारी और 8,084 स्थायी कर्मचारी हैं
  5. वर्तमान कर्मचारियों को प्रदान किए गए सभी सरकारी लाभ एक वर्ष तक जारी रहेंगे।

क्यों बिक रहा है AIRINDIA?
दरअसल 2007 में राज्य के स्वामित्व वाली घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय के बाद से राष्ट्रीय वाहक घाटे में चल रहा था और परिचालन में रहने के लिए करदाताओं द्वारा वित्त पोषित खैरात पर निर्भर था। सरकार ने कहा कि वह एयरलाइन चलाने के लिए हर दिन लगभग 200 मिलियन रुपये ($ 2.6m) का नुकसान कर रही है।

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