Chath Puja: जानें क्यों मनायी जाती है छठ पूजा, और कैसे करें पूजा की छठी मैया हो जाएंगी प्रसन्न…

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CHATH PUJA 2021
CHATH PUJA 2021

शामभवी शाही, नई दिल्ली: छठ पूजा बिहार और उत्तर प्रदेश का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। छठ पूजा का यहां के लोगों के लिए एक खास महत्व है। छठ पूजा वैसे तो दो दिन का त्योहार है लेकिन इसकी तैयारियों में लोग काफी दिनों पहले से ही जुट जाते हैं। महिलाएं अपने घरों में पूजा की तैयारियों के साथ साथ ही पकवान बनाने जैसी प्रक्रियाओं का भी आरंभ कर देती हैं।
छठ पूजा का व्रत महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान को लंबी आयु की कामना के लिए करती हैं। महिलाएं षष्ठी तिथि को छठ का व्रत रख कर अगले दिन यानी की सप्तमी को उगते हुए सूर्य देवता को जल अर्पित करने के साथ ही अपने व्रत को तोड़ती हैं।

क्या है छठ पूजा का इतिहास?
छठ पूजा के बारे में पौराणिक कथाओं में बहुत सी बातें बताई गईं हैं। ऐसी बहुत सी कहानियां हैं जिनसे छठ पूजा के प्रारंभ को जोड़ा जाता है।

  1. महाभारत काल से छठ पूजा का विधान
    बहुत लोगों का मानना है की छठ पूजा की प्रथा महाभारत काल में सर्वप्रथम शुरू की गई थी। कुंती को कर्ण सूर्य देवता के आशीर्वाद से मिले थे जिसके कारण उन्हें सुरपुत्र कर्ण कहा जाता था। सूर्य देवता ने कर्ण को कवच और कुंडल प्रदान किया था जो हमेशा कर्ण की रक्षा करता था। कर्ण सूर्य देवता के बहुत बड़े भक्त थे और घंटों जल के भीतर खड़े होकर सूर्य देवता की आराधना करते थे। लोगो के कहना है की छठ पूजा में अर्घ्य की परंपरा का इज़ात यहीं से हुआ है। तथा महिलाएं सूर्य देवता की आराधना इसलिए करती हैं की कर्ण के जैसे ही वह उनके पुत्रों को भी सुरक्षा प्रदान करें।
  2. राजा प्रियवंद की कथा
    बहुत समय पहले प्रियवंद नाम के एक राजा हुआ करते थे। राजा हर प्रकार से संपन्न और सुखी थे परंतु उनके जीवन में कष्ट बस इतना था कि उनकी को संतान नहीं थी। राजा को निसंतान होने का भीषण दुख था। इसके विषय में बात करने के लिए राजा महर्षि कश्यप के पास गए इस पर महर्षि कश्यप ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ करने का सुझाव दिया। राजा ने यज्ञ में चढ़ाई हुई खीर रानी को खिलाया जिसके बाद उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ पर वह मरा हुआ था। उसके मृत शरीर को लेकर राजा शमशान गए और निराशा के कारण वह अपने शरीर का परित्याग करने ही वाले थे तभी वहां ब्रह्मा जी की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और राजा से कहा कि मैं सृष्टि के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं इसी कारण मेरा नाम षष्ठी भी है। उन्होंने राजा से उनकी पूजा करने को कहा साथ ही इस पूजा के बारे में और लोगो को बताने को भी कहा। राजा ने उनके कहे अनुसार माता का व्रत किया उस दिन शुक्ल पक्ष की षष्ठी थी और इसके पश्चात राजा को संतान के प्राप्ति हो गई।
  3. द्रौपदी के द्वारा पांडवों के लिए छठ व्रत
    कथाओं के अनुसार महाभारत के दौरान द्रौपदी ने अपने पांचों पतियों यानी की पांडवों के लिए छठ का व्रत कर उनके लंबी आयु और उत्तम जीवन की कामना की थी। जिसके फलस्वरूप पांडवों को उनका राज पाठ वापस मिल गया।

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