Diogo Alves story in hindi: 181 साल से जार में बंद है इस शख्स का सिर, वजह जान रात को नहीं जा पाएंगे बाथरूम

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Diogo Alves: कहानी है सन् 1835 की ये बात है करीबन 1835 की, जब पुर्तगाल में क़त्ल-ए-आम का खौफनाक मंजर देखने को मिला था। जब एक डिओगो अल्वेस नाम का सीरियल किलर, अपनी जीवनी के लिए मेहनत का काम नहीं बल्कि लोगों को मौत के घाट उतार देता था। जुर्म कुबूल करने पर अल्वेस ने कहा था कि उसे 70 के बाद गिनती नहीं आती, तो वो बता ही नहीं सकता कि उसने कुल कितने कत्ल किए हैं?

स्पेन में जन्मा और लिस्बन में मचाया कोहराम:

डिओगो अल्वेस 1810 में स्पेन के एक छोटे से शहर ग्लेशिया में पैदा हुआ था। गरीबी के कारण अपना घर छोड़ने के बाद, डिओगो पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में काम ढूंढने आया। जहां उसने छोटे-मोटे काम किए। कई जगह नौकर बना, तो कई जगह मज़दूर। ऐसे ही कुछ समय बीता और एक दिन डिओगो की नज़र उसके आसपास के कुछ लोगों पर गई। ऐसे लोग जो बिना काम करें जिंदगी जी रहे हैं, बिना मेहनत करे पैसे कमा रहे हैं।

बस फिर क्या था, इसी सोच के साथ डिओगो अल्वेस ने क्राइम की दुनिया में कदम रखा और लिखता गया जुर्म की एक खौफनाक दास्तान। सीरियल किलर बनने से पहले डिओगो ने चोरी-चकारी करना शुरू किया। अकसर, ख़ाली जगह पर घूम रहे लोग, इसके जाल में फंस जाते थे। ये डकैती करता था और अपनी आराम भरी ज़िंदगी जीता था। जब पैसे ख़त्म होने वाले होते थे, ये फिर किसी ना किसी को अपना शिकार बना लेता था। ऐसा कई समय तक चला पर लेकिन कहते है ना जितना मिले उतना
कम ही लगता है।

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अपनी जीवनी के लिए लोगों को डरा-धमका कर पैसे निकालने में माहिर डिओगो, इस लालच में आ गया था कि क्यों ना कुछ बड़ा किया जाए? अभी तक डिओगो कई लोगों को मौत के घाट उतार चुका था। उसने बिना किसी डर के चाकू छुरी चलाई और इंसानियत का कत्लेआम करना शुरू किया। कुछ बड़ा करने के लिए अब डिओगो ने कई जगहों की रेकी की। जिसके बाद एल्विस ने राजधानी में स्थित एक पुल को अपना अड्डा बनाया।

एक ऐसा पुल जो कि करीबन 213 फीट ऊंचा और करीबन 1 किलोमीटर लंबा था। ये पुल अक्सर उन लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें बाहरी शहरों से आना-जाना करना होता था। उस समय इस पुल का सबसे ज्यादा उपयोग किसान करते थे। अक्सर ये लोग झुंड में आते, काम करते और वैसे ही वापस चले जाते थे। कई दफा ऐसा भी हुआ कि किसी किसान को कुछ कारणों से अकेले जाना पड़ाता था। वहीं डिओगो का शिकार बन जाता था। शुरू में डिओगो चाकू दिखा कर, पैसे लूट लेता था और पकड़े जाने के डर से लोगों को पुल से नीचे फेक देता था।

शहरों में किसानों के ग़ायब होने की ख़बरें बढ़ने लगी

अब राजधानी लिस्बन और आस-पास के शहरों में किसानों के ग़ायब होने की ख़बरें बढ़ने लगी। क़रीबन 20-30 किसानों की डिओगो जान ले चुका था लेकिन इस दास्तान का अंत ये नहीं था। बढ़ते मामलों का कारण पुलिस को अब ऐक्शन में आना पड़ा। जिसके बाद पुल के नीचे से कई शव बरामद किए जा चुके थे। ऐसे शव जिनपर घाव के कोई निशान नहीं थे। जिस कारण पुलिस की जाँच का रुख़ बदला और इस मोड़ पर ले आया की ये मौत का खेल आत्महत्या के कारण है। इतने लोग ग़ायब हुए लेकिन पुल के नीचे पानी होने के कारण सभी के शव को ढूँढ पाना मुश्किल काम था।

अब ये आँकड़ा और ऊपर जाने लगा और ग़ायब हुए लोगों की संख्या 40 पार हो गई। पुलिस भी हैरान थी कि से इस सिलसिले का ख़ात्मा क्यों नहीं हो रहा! डिओगो इतना निर्दय हो चुका था कि ये मंजर और भयानक होने लगा। हैरान परेशान पुलिस को एक बार फिर से जाँच करनी पड़ी। जिसके बाद ये बात सामने आई कि कई किसान ऐसे थे जो किसी आर्थिक तंगी से नहीं जूझ रहे थे। तो उनका एक ही जगह से ग़ायब होना कही ना कही सीरियल किलिंग की तरफ़ एक इशारा तो था पर कोई ठोस सबूत नहीं।

जैसे जैसे समय बीता, अल्वेस की क्रूरता बढ़ने लगी। अगर कोई अपने पैसे नहीं देता था तो उसका केवल एक ही अंजाम था, डिओगो के चाकू से उसकी बेरहमी से मौत। अब समय तो बीत रहा था, लेकिन पुल के नीचे शवों के मिलने की ये कहानी का कोई अंत नहीं था। लगातार पाए जा रहे शव से ये सामने आया की कहीं ना कहीं कई मृत शरीरों पर एक जैसे निशान मिलना कोई आम बात नहीं थी। प्रशासन हैरान था लेकिन डिओगो अब भी इस कत्ल पर कत्ल कर कहा था।

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ये संख्या और बढ़ने लगी जिसके बाद लिस्बन के पुल पर लोगों का गुजरना कम हो गया। सभी में एक डर था कि वहां से गए तो वापस नहीं आओगे, मिलेगी तो सिर्फ़ दर्दनाक मौत। हालात का जायज़ा ले रही प्रशासन ने ये निर्णय लिया कि शायद इस पुल को बंद करना एक मात्र उपाय बचा है। क़रीबन दो साल तक वो पुल बंद रहा। उस पर से गुजरने पर रोक लगा दी गई। ये देखा गया कि मौत के मामलों में गिरावट आई है। हालांकि सीरियल किलिंग करने वाला डिओगो अल्वेस अब तक 50 से ज़्यादा लोगों को मारकर, पुल से नीचे गिरा चुका था लेकिन तब भी उसी शहर में बिना किसी डर के जी रहा था।

अचानक हत्या हो गई थी बंद

डिओगो अल्वेस को डर था कि अब अगर वो पकड़ा गया तो ज़रूर ही उसका खेल ख़त्म हो जाएगा। फिर क्या था, ये ख़ौफ़नाक दास्तान कुछ समय के लिए बंद हुई। लोगों का ग़ायब होना बंद और पुल से गुजरने का डर ख़त्म हुआ। ये मानो एक ऐसा साया था कि अगर पुल से गए तो ज़िंदगी का अंत हो जाएगा। इतने लोगों की जान लेने के बाद भी उसे कोई अफ़सोस नहीं था। ज़ाहिर सी बात है कि अगर अपराधी को ना पकड़ा जाए तो उसके अपराध बढ़ जाएंगे और हुआ भी कुछ ऐसा ही..

2-3 साल तक डिओगो ने कुछ नहीं किया लेकिन एक बार फिर से ये सिलसिला शुरू से शुरू हुआ। फ़र्क़ इतना था कि इस बार डिओगो अकेला नहीं, एक टीम के साथ लौटा था। ये गैंग अब आर्थिक स्थिति नहीं, अपने शिकारियों का रुतबा देखते थे। उन लोगों को निशाना बनाया जाता था जो रहीसी भरी ज़िंदगी जी रहे थे। अब एक बार फिर से शहर दहशत के इस मंजर का सामना कर रहा था। तेज़ करार चाकू चलते थे और टीम का सरदार डिओगो फ़रार हो जाता था। पहले की ही तरह एक बार फिर से पुलिस अनुमान नहीं लगा पा रही थी, कि ये सब क्या हो रहा है।

कई नामी लोगों को लूटने के बाद ये ग्रुप शहर से बाहर अपने अड्डे पर चले जाते थे। रात में वारदात को अंजाम दिया जाता था। जिस कारण से पुलिस का इन तक पहुंचना बेहद मुश्किल का काम था। इस बार ये मौत का खेल एक डॉक्टर से साथ खेला गया। दिन ढलने के बाद, डिओगो और उसके गैंग ने डॉक्टर के घर पर हमला किया। जहां बेरहमी से उसका कत्ल करने के बाद, घर लूटा और फ़रार हो गए। उसी दौरान एक पड़ोसी घर आया और ये दर्दनाक हादसे की जानकारी पुलिस को दी।

मौक़े पर पहुंची पुलिस ने पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी। तभी कुछ अज्ञात लोगों को शहर के बोर्डर पर पकड़ा गया। सरदार डिओगो अल्वेस अब भी चुप था, जांच के बाद पता चला कि यहीं गैंग शहर में नामी लोगों को अपना शिकार बना रही थी। वहीं पहले की तरह चाकू के निशान पाने पर कानूनी जांच की गई। जिसके बाद डिओगो ने अपना जुर्म क़बूला।

उसने बताया कि उसे 70 के आगे गिनती नहीं आती। जिस कारण उसे नहीं पता कि उसने कितनी संख्या में लोगों की जान ली है। इस सीरियल किलिंग का परिणाम ये निकला की फ़रवरी 1841 में डिओगो को फांसी की सज़ा सुनाई गई। ये पुर्तगाल का पहला सीरियल किलर था और अखरी इंसान जिसको इस देश में फांसी की सजा दी गई।

उस वक़्त के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने सरकार से माँग की कि डिओगो के सर को उन्हें सौपा जाए। जिससे वो इस बात का अध्ययन कर सके कि आख़िर ऐसा अपराध करने वाले के दिमाग़ में क्या चलता है? क्यों लोग दूसरों की जान लेने के आदी हो जाते है? इस अध्ययन को फ्रेनोलॉजी (Phrenology) कहा जाता है, यानी मस्तिष्क-विज्ञान। ये कटा हुआ सिर आज भी लिस्बन विश्वविद्यालय में एक जार में प्रिजर्व करके रखा गया है। विश्वविद्यालय का ये हिस्सा केवल छात्रों के लिए खुला है और आम जनता यहां नहीं जा सकती।

हालांकि, अल्वेस की खोपड़ी की कभी जांच नहीं की गई और एक जार में प्रिजर्व किया गया क्योंकि फ्रेनोलॉजिस्ट अपनी थ्योरी को सही नहीं ठहरा सके। इसलिए, उन्होंने अल्वेस के सिर को सुरक्षित रखा और उम्मीद की कि भविष्य की तकनीक उनके इस अध्ययन को सफल ज़रूर दिलाएगी। सवाल ये है कि “क्या डिओगो का कटा हुआ सिर भविष्य में कभी जीवित हो पाएगा?”

सुप्रिया राज को मीडिया छेत्र में लगभग दो सालो का अनुभव है। सुप्रिया दैनिक भास्कर में बतौर एंटरटेनमेंट न्यूज़ कंटेंट राइटर के रूप में काम किया है, उसके बाद कई सारे मीडिया हाउस में फ्रीलान्स भी किया किया है। फरवरी 2023 से समाचार नगरी के साथ जुडी है और यहां (एंटरटेनमेंट, धर्म/अध्यात्म, ज्योतिष, गैजेट, और ऑटो) की खबरों पर काम कर रही हैं। सुप्रिया राज का मकसद लोगों तक बेहतरीन हिंदी स्टोरी पहुंचाना है।