नई दिल्ली: 83 अरब डॉलर की लागत से तैयार अफगानी सुरक्षा बल तालिबान के सामने इतनी जल्दी और पूरी तरह से ध्वस्त हो गई ऐसा लगा अमेरिकी निवेश का अंतिम लाभार्थी तालिबान ही है उन्होंने ना केवल अपनी दहशतगर्दी से ही नहीं बल्कि अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई गोला बारूद, बंदूकें, हेलीकॉप्टर और बहुत से हथियार भी हत्या लिए है।

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तालिबान ने आधुनिक सैन्य उपकरणों की एक बेस पर कब्जा कर लिया और फित उन्होंने अफगान बलों पर कब्जा कर लिया जो की जिला और केंद्रों की रक्षा करने में विफल रहे। बता दे इस बेस पर कब्जा कर तालिबान को लड़ाकू विमानों सहित बड़ा लाभ हुआ, जब तालिबान ने प्रांतीय राजधानियों और सैन्य ठिकानों को आश्चर्यजनक गति से कब्जा किया तो सप्ता के अंत में सबसे बड़े पुरस्कार के तैर पर काबुल को हत्या हिया।

एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने सोमवार को यह पुष्टिकरण किया की तालिबान के पास अमेरिका द्वारा कम किए गए अफगान उपकरणों का अचानक संचय बहुत बड़ा है। अधिकारी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने के लिए अधिकृत नहीं थे और इसलिए नाम न छापने की शर्त पर बात की और बताया की यह उलटफेर अमेरिका द्वारा अफगान सरकारी बलों के तरीके को गलत ठहराने का एक शर्मनाक परिणाम है। सैन्य और साथ ही खुफिया एजेंसियां ​​- जिन्होंने कुछ मामलों में लड़ाई के बजाय अपने वाहनों और हथियारों को आत्मसमर्पण करने का विकल्प चुना।

एक स्थायी अफगान सेना और पुलिस बल का उत्पादन करने में अमेरिका की विफलता, और उनके पतन के कारणों का अध्ययन सैन्य विश्लेषकों द्वारा वर्षों तक किया जाएगा। हालाँकि, बुनियादी आयाम स्पष्ट हैं और इराक में जो हुआ उससे अलग नहीं हैं। सेनाएं खोखली निकलीं, जो बेहतर हथियारों से लैस थीं।

इसके विपरीत, तालिबान विद्रोही, कम संख्या में, कम आधुनिक हथियार और बिना वायु शक्ति के, एक बेहतर बल साबित हुए। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उस श्रेष्ठता के दायरे को काफी हद तक कम करके आंका, और खुफिया एजेंसियों को तालिबान के अंतिम आक्रमण की उम्मीद नहीं थी जो इतनी शानदार ढंग से सफल हुआ। इसी वजह से आज अफगानिस्तान में तालिबान का पूरा कब्जा हो गया है।

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