Happy Birthday Didi: जन्मदिन पर जानिए ममता के वो किस्से जो बहुत कम लोग जानते है

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Happy Birthday Mamta banerjee
Happy Birthday Mamta banerjee

योगिता लढ़ा, नई दिल्ली। Happy Birthday Didi: भारतीय राजनीति में दीदी कहलाने वाली ममता बन्द्योपाध्याय बनर्जी (Mamta Bandyopadhyay Banerjee) का आज 67वां जन्मदिन है। ममता का जन्म 5 जनवरी 1955 में कोलकाता, वेस्ट बंगाल (Kolkata, West bengal) में हुआ था। ममता के पिता का नाम प्रोमलेश्वर बनर्जी (Promileswar Banerjee) और मां का नाम गायत्री देवी (Gayetri Devi) है। आपको बता दें, ममता का जन्म एक बंगाली हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ममता के लिए बचपन कठिन रहा था क्योंकि जब वो 17 वर्ष की थी, तब उनके पिता का देहांत हो गया था। ममता के पिता एक स्वतंत्र सेनानी भी रह चुके हैं।

Happy Birthday Mamta banerjee (1)

ममता के पास हैं 4 से अधिक डिग्री:

बनर्जी ने 1970 में देशबन्धु शिशुपाल (Deshbandhu Shishupal) से उच्च माध्यमिक (Higher Secondary Board) की पढ़ाई करने के बाद, जोगमाया देवी कॉलेज (Jogmaya Devi College) से इतिहास में ग्रेजुएट हुई। इसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय (University of Calcutta) से इस्लामी इतिहास (Islamic history) में मास्टर की डिग्री प्राप्त की। ममता का पढ़ाई का सफर यहीं तक नहीं था।

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बनर्जी ने श्री शिक्षाशयन कॉलेज (Sri Shikshashayan College) से शिक्षा की डिग्री और जोगेश चन्द्र चौधरी लॉ कॉलेज (Jogesh Chandra Choudhary Law College) से कानून की डिग्री हासिल की। आपको बता दें, उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट ऑफ़ लिटरेचर (Doctorate of Literature) की डिग्री से सम्मानित किया गया था।

राजनीति नहीं है नया खेल:

हैरानी की बात ये है कि ममता राजनीति में आज या आज से 10 साल पहले से नहीं आई हैं। जानकारी के अनुसार ममता 15 वर्ष की थी जब उन्होंने राजनीति में अपने कदम रखे थे। जब ममता जोगमाया देवी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी, तब उन्होंने छात्रा परिषद यूनियन (Chhatra Parishad Union) का गठन किया था। ये पार्टी कांग्रेस पार्टी का हिस्सा थी।

1970 में बनी कांग्रेस का हिस्सा:

आपको बता दें, ममता बनर्जी 1970 के दशक में एक उभरती युवा महिला नेता के रूप में जानी जाती थी। साल 1976 से 1980 तक ममता महिला कांग्रेस की महासचिव रही। जिसके बाद वर्ष 1984 में आम चुनावों में ममता बनर्जी ने से जीत का परचम लहराया। इसी साल उन्हें इंडियन यूथ कांग्रेस (Indian Youth Congress) की महासचिव बनाया गया था। इसके बाद साल 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 के आम चुनावों में उन्होंने अपनी कोलकाता दक्षिण सीट पर विजय बरकरार रखी।
ममता को साल 1991 में उस समय के प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) द्वारा मानव संसाधन विकास (Human Resources Development), युवा मामले और खेल (Youth Affairs and Sports) और महिला एवं बाल विकास (Women and Child Development) के लिए संघ राज्य मंत्री (Union Minister of State) के पद पर नियुक्त किया गया था।

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Mamata Banerjee

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का किया गठन:

अब साल था 1997, पश्चिम बंगाल (West Bengal) कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सोमेंद्र नाथ मित्र (Somendra Nath Mitra) की अलग विचारधाराओं के कारण ममता बनर्जी ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) का गठन किया। कुछ ही समय में ये पार्टी राज्य कम्युनिस्ट सरकार पर हावी होने लगी।

पहले कार्यकाल (1999-2000) में बतौर रेल मंत्री के तौर पर किया काम:
वर्ष 1999 में ममता भारतीय जनता पार्टी (BJP)के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनी और रेल मंत्री के तौर पर अपनी भूमिका निभाई। इस कार्यकाल में उन्होंने देश के विभिन्न थानों को जोड़ने वाली रेलवे एक्सप्रेस के प्रोजेक्ट को पूरा किया।

दूसरे कार्यकाल (2009-2011) में भी रही रेल मंत्री:

इस बार उनका निशाना हर बार की तरह पश्चिम बंगाल पर था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्होंने इस पद को छोड़ दिया था। आपको बता दें उनके 2 साल के कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे घाटे में चल रही थी। उनके द्वारा किए गए कई वादों को पूरा नहीं किया गया था।

मुख्यमंत्री के तौर पर 2011 से 2016 तक पश्चिम बंगाल को संभाला:

ममता बनर्जी ने 20 मई 2011 को पश्चिम बंगाल कि सीएम के तौर पर शपथ ली थी। आपको बता दें, ममता बंगाल की पहली मुख्यमंत्री (Chief Minister) के रूप में सामने आई थी। अप्रैल 2015 को यूनिसेफ इंडिया (UNICEF INDIA) के एक अधिकारी ने नंदिया को भारत का पहला खुले में शौच मुक्त जिला घोषित किया था। जिसके लिए ममता सरकार को बधाई दी गई थी। ममता की इतिहास और संस्कृति में गहरी रुचि रही है। पहले कार्यकाल के दौरान ममता सरकार ने कोलकाता मेट्रो (Kolkata Metro) के कई स्टेशनों का नाम में बदलाव कर उन्हें स्वतंत्रा सेनानियों के नाम पर रख दिए थे।

मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरा कार्यकाल (2016-2021):

विवादों में घिरी ममता ने 2016 में भी जीत का परचम लहराया था। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने 293 में से 211 सीटों पर भारी जीत हासिल कर बहुमत से सरकार बनाई थी।

तीसरा कार्यकाल (2021- वर्तमान) में खेला खेल:

तीसरे कार्यकाल में मोदी लहर तो आपको याद ही होगी। सियासी शतरंज में भाजपा और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। हालांकि ममता बनर्जी नंदीग्राम से हार गई थी लेकिन उन्होंने 292 में से 213 सीटों पर अकेले लड़ने वाली सरकार बनाई। जिसके बाद ममता ने 5 मई 2022 को मुख्यमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी।

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