दोस्ती यह शब्द ही काफी है….
इसके बारें में जितनी बातें करो वो कम सी पड़ जाएगी…

इस एक शब्द मे इतनी ताकत है की यह आपकी आखों में आसुं और चमक दोनो ले आती है…

एक अंग्रेजी को बहुत लोकप्रिय क्वोट है जो हम सबने बचपन में जरूर सुना होगा
” A friend in need is a friend in deed “
लेकिन हमारे लिए बचपन मे क्या ही “need” और क्या ही “problem” हमारे लिए तो…
हमारा सारा वक्त दोस्त के लिए और दोस्त का सारा वक्त हमारे लिए…
क्या दिन थे ना वो… हमारे बचपन के…
जब प्लेग्राउंड हमारा घर होता था और दोस्त हमारे लिए फैमली उनका टिफिन हमारा खाना..
स्कूल जाने का बहाना वो थे…
चाहे हम लड़े या झगड़े पर फिर वहीं पल भर में दोस्त बन जाते थे … झठ से कट्टी और पट्ट मे बट्टी…

क्या दिन थे वो सच में …

लेकिन आज की बात करें तो इस soo called ” need” ki importance दोस्त से भी बढ़कर हो गई है क्योंकि बिना किसी के “need” या जरूरत के …
कोई हमें यहा याद ही नहीम करता…
और अगर किसी से किसी भी वजह से दोस्ती टूट गई तो शायद… वो बचपन की कट्टी-बट्टी तो दूर तक याद नही आती…
क्योंकि बीच मे आजाती है, अभी की most trending word “ego” और बस फिर कोशिशे वहीं रुक जाती है…

हम सभी के लाइफ में कुछ एैसे दोस्त जरूर होंगे जिन्हें हम “miss” तो बहुत करते है लेकिन सिर्फ इस “ego” कि वजह से कोशिश नहीं करते … क्योंकि उलके छोड़ के जाने के बाद कुछ किया या नही किया लेकिन अपना “Ego” का लेवल जरूर बढ़ते गए…

काश ..! काश…

आप सबने एक बार ही सही पर कोशिश कि होती…
एक बार रोक लिया होता अपने सबसे प्यारे दोस्त को… दिल की बात कर ली होती…
गले लगा लिया होता…
काश एक बार तो कोशिश की होती…

Happppyyyy Friendship Day to all.

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