बॉलिवुड के मुन्ना भाई यानी (बाबा) जो अपने अंदाज के लिए जाने जाते है आज उन्होंने अपने जिन्दगी के 62 साल पूरे कर लिए हैं। तो बोले तो बिडू अब बाबा 62 का हो गयला हैं। तो आज अपून लोग बाबा की जिदंगी के ऊपर बात करने जा रहा है। तो अपने बाबा की जिंदगी उनकी फिल्मों की तरह ही रही हैं। जिसमें कई उतार – चढ़ाव बाबा के साथ साथ हमने भी देखा हैं, आज हम उन्ही कहानियों को शुरू से शुरू करते हैं। साल था 1959 जब उस समय के दमदार और जानें माने निर्देशक सुनील दत्त और उस समय कि मशहूर अभिनेत्री नर्गिस के घर किलकारीयां गूंज उठी और जन्म हुआ संजू बाबा का। तो आइए ले चलो हम आपको बाबा की जिंदगी की शहर करवाने।

बाबा की जिंदगी का कोई ऐसा दौर नहीं रहा होगा जब परेशानियों ने उनका पीछा छोड़ा हो।
अगर बात करे उनकी पर्सनालिटी की तो उनका अंदाज बाकी सारे एक्टर्स से अलग और कमाल का है, चाहें वो उनके चलने का स्टाईल हो या एक्टिंग का।

1981 में रॉकी फिल्म में बड़े पर्दे पर आ कर अपनी अलग छाप छोड़ दी थी पर अगर निजी जिन्दगी कि बात करे तो उनके करियर की शुरूआत करते ही बाबा के बुरे दिन की शुरूआत भी तभी से हो गई थी। उनकी पहली फिल्म के प्रीमियर से ठीक तीन दिन पहले उनकी मां और मशहूर अभिनेत्री नर्गिस दुनिया को छोड़कर चली गईं। इसके बाद अगले साल ड्रग्स लेने की वजह से पांच महीने की जेल और अमेरिका के नशा मुक्ति केंद्र में दो साल रहकर ड्रग्स से पीछा छुड़ाने के बाद वापस लौटकर बॉलीवुड में बाबा ने वापसी की।

इसके बाद संजय दत्त को खुद से उम्र में बड़ी ऋचा शर्मा से प्यार हुआ और शादी भी हो गई। लेकिन संजय जब तक ऋचा के साथ को ठीक से महसूस कर पाते, उन्हें पत्‍‌नी के ब्रेन कैंसर की खबर ने अंदर से झनझोर कर रख दिया।
संजय दत्त के फिल्मी करियर का ग्राफ बेशक तेजी से चढ़ता गया, लेकिन उनकी निजी जिंदगी में ठहराव नहीं आया।उस समय संजय दत्त ने साजन, सड़क और खलनायक जैसी सुपरहिट फिल्में दी थी।

1993 से तो संजय दत्त की जिंदगी में ऐसा तूफान लाया जिसे वो अपने से कभी चाह कर भी भूल नहीं सकते। जब मुंबई बम धमाकें की जांच के दौरान संजय दत्त पर हथियार रखने का आरोप लगा और उन्हें 16 महीने की जेल काटनी पड़ी और लगभग 20 साल तक अदालतों के चक्कर काटने के बाद भी जेल जाना पड़ा।

उसके बाद अगर कुछ positive हुआ तो ये कि फिल्म मुन्नाभाई उलके किसमत में आई, इस फिल्म को करने के बाद संजय दत्त की बैड ब्वॉय (bad boys) की इमेज भी बदलने लगी। यह फिल्म सही मायनों में उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म के सीक्वल लगे रहो मुन्नाभाई से उनके करियर को और बुलंदी मिली।अग्निपथ के रीमेक में विलेन के रूप में कांचा की भूमिका को निभाकर उन्होंने एक्टिंग के मायने ही बदल दिए।

इस बीच मान्यता से शादी के बाद वो थोड़े अनुशासित हुए। दो बच्चों के पिता बनने के बाद लगा कि अब उनके जीवन में सब कुछ ठीक हो गया है, लेकिन पिछले साल संजय दत्त को फिर से मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने खुद के कैंसर के बारे में अपने चाहने वालों को बताया। हालांकि अब संजय दत्त पूरी तरह से ठीक और अपनी जिंदगी का आनंद ले रहे हैं।
और हम यहीं दुआ करेगें की वो हमेशा खुश रहे।

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