जानिए कैसे अमरिंदर सिंह ने तय किया आर्मी ऑफिसर से राज्य का मुख्यमंत्री बनने तक का सफर…

पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज अपने पद से इस्तिफा दे दिया है। उन्होने अपना इस्तिफा राजभवन में एक प्रेस वार्ता में दिया, उनका कहना था कि वह अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे थे। इसके बाद अब कैप्टन काफी चर्चा में आगए है।

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amrinder singh biography
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गुरुत्व राजपूत, नई दिल्ली। पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज अपने पद से इस्तिफा दे दिया है। उन्होने अपना इस्तिफा राजभवन में एक प्रेस वार्ता में दिया, उनका कहना था कि वह अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे थे। इसके बाद अब कैप्टन काफी चर्चा में आगए है। आज हम आपको अमरिंदर सिंह के कैप्टन से मुख्यमंत्री तक बनने के सफर की कहानी बताएंगे।

अमरिंदर सिंह का जन्म 11 मार्च 1942 को पंजाब के पटियाला शहर में एक बड़े खानदान में हुआ जो सिद्धू बराड़ के फुल्किया वंश से संबध रखता था। अमरिंदर के पिता यादविंद्र सिंह पटियाला स्टेट पुलिस में इंस्पेक्टर जनरल के पद पर थे और बताया जाता है कि दुसरे विश्व युद्ध के समय यादविंद्र सिंह इटली और बर्मा भी गए थे। दुर्भाग्यवष 90 के आयु में अमरिंदर के पिता जी का निधन हो गया। इनकी माता का नाम का नाम महारानी मोहिंदर कौर था और 96 कि उर्म में उनका देहांत हो गया था। अमरिंदर सिंह की बहन हेमिंदर कौर की शादी भूतपूर्व फॉरेन मिनिस्टर के. नटवर सिंह से हुई थी।


सिंह का विवाह 1964 में प्रेनीत कौर से हुआ जो लोकसभा सांसद रह चुकी हैं, और इसी के साथ साल 2009- 2014 के समय में भारत सरकार मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स में काम भी कर चुकी हैं। अमरिंदर सिंह का एक बेटा रनिंदर सिंह और एक बेटी जय इन्दर सिंह है। बेटी का विवाह दिल्ली के एक बड़े व्यापारी गुरपाल सिंह से हुई।

अब बात करतें है अमरिंदर सिंह की शिक्षा कि तो इन्होने अपनी पढ़ाई वेल्हम बॉयज स्कूल और लॉरेन्स स्कूल सनावर से की। आपको बता दे कि राजनैतिक सीढ़ी चढने से पहले अमरिंदर सिंह ने भारतीय सेना में अपना किरदार निभाया। भारतीय सैन्य अकादमी और एन.डी.ए से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्हें 1963 में भारतीय सेना में शामिल किया गया और दूसरी बटालियन सिख रेजीमेंट में तैनात किया गया। इसी रेजीमेंट में उनके पिता एवं दादा जी ने सेवाएं दी थी। अमरिंदर ने फील्ड एरिया- भारत तिब्बत सीमा पर दो साल तक सेवाएं दी और उन्हें पश्चिमी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल हरबक्श सिंह का ऐड-डि कैम्प नियुक्त किया गया था। इसी के साथ अमरिंदर सिंह भारत-पाकिस्तान वॉर में भी शामिल थे। हालांकि भारतीय सेना में उनका कैरियर छोटा रहा लेकिन इसके बाद से ही अपने घर का अमरिंदर कैप्टन अमरिंदर कहलाने लगा।

भारतीय सेना के बाद अब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राजनैतिक गलियारो में अपना कदम रखा। आपको बता दें की राजीव गांधी और कैप्टन बचपन से दोस्त थे और राजीव गांधी ने ही कांग्रेस में कैप्टन के पांव रखवाए थे। सन 1984 में इन्होने तात्कालिक भारतीय प्रधानमंत्री के ऑपरेशन ब्लू स्टार के आर्मी एक्शन के विरोध में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। उसके तुरंत बाद वे पंजाब की आंचलिक राजनैतिक पार्टी अकाली दल से जुड़े और तलवंडी विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर अपना राजनैतिक करियर आगे बढ़ाया। अकाली दल से चुनाव जीतने के बाद वे पंजाब सरकार के एग्रीकल्चर और फारेस्ट मिनिस्ट्री में थे।


साल 1992 में उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया और तुरंत अपनी एक पार्टी शिरोमणि अकाली दल बनायी। ये पार्टी कुछ ख़ास न कर सकी और इस पार्टी ने हाथ में बस निराशा ही दी। इसके बाद उन्हें इसी साल पटियाला से ही फिर का सामना करना पड़ा, इस बार वे अपने प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा से हारे थे। लेकिन इतनी हार का सामना करने के बाद भी उन्होने खुद पर हार को हावी नहीं होने दिया। इसके बाद उन्हें कांग्रेस के पंजाब प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया गया। पहली बार वे साल 1999 से 2002 तक पंजाब प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष रहे। साल 2002 में उन्हे पंजाब कि कमान हाथ में मिली। उसके बाद साल 2010 से 2013 तक वे फिर से पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। 27 नवम्बर 2015 में कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह के हाथ में 2017 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की बागडोर सँभालने दी और11 मार्च 2017 में कांग्रेस पार्टी ने इनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव जीता। 16 मार्च 2017 को इन्होने पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

आपको जान कर आशचर्य होगा कि मंत्री और कैप्टन होने के साथ-साथ अमरिंदर सिंह एक लेखक भी है, इन्होने बहुत सारी किताबे प्रकाशित करी जिसमे कुछ प्रमुख है ए रिज टू फार, लेस्ट वी फॉरगेट, द लास्ट सनसेट: राइज एंड फाल ऑफ़ लाहौर दरबार, द सिख्स इन ब्रिटेन: 150 इयर्स ऑफ़ फोटोग्राफ । अमरिंदर किताबो के द्वारा अपने अनुभवों को प्रकट की कोशिश करते हैं।

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