अक्सर विनिवेश यानी “Disinvestment” को निजीकरण यानी “Privatisation” के चश्मे से देखा जाता है. विनिवेश का अर्थ “Privatisation” बिल्कुल नहीं होता है. जब हम सरकार के विनिवेश फ़ैसलों के बारे सुनते हैं तो हमें यही लगता है कि सरकार पूरी तरह से निजीकरण की ओर अग्रसर हो रही है. हम इस ग़लतफहमी से तभी निकल पाएंगे जब हमें इन दोनों शब्दों का मतलब पता हो. तो आइये जानते है क्या है इन दोनों शब्दों के असल मायने.

विनिवेश (Disinvestment)

जब सरकार किसी सरकारी कंपनी से अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर उससे रकम जुटाती है, तो इस प्रक्रिया को कहते हैं डिस-इन्वेस्टमेंट.

विनिवेश में सिर्फ कुछ हिस्सा ही बेचा जाता है.

विनिवेश की प्रक्रिया में सरकार का कंपनी पर मालिकाना हक बना रहता है.

निजीकरण ( Privatisation)

किसी सार्वजनिक क्षेत्र को पूरी तरह से निजी में तब्दील करने की प्रक्रिया को निजीकरण कहते हैं.

निजीकरण में सरकार अपनी 51% से ज्यादा की हिस्सेदारी किसी निजी कंपनी को बेच देती है.

निजीकरण में सरकार का कोई मालिकाना हक नहीं रह जाता हैं.

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