दिशा रवि के टूलकिट मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि टूलकिट में ऐसी सामग्री डालकर लोगों को भ्रमित करने की तैयारी की गई थी. उन्होंने बताया कि टूलकिट के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वो मूवमेंट से जुड़े सरकार के खिलाफ इस आंदोलन का हिस्सा बने. भारत सरकार खिलाफ बड़ी साजिश रची जा रही थी. दिल्ली पुलिस ने कहा इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिन्हें हम सील बन्द लिफाफे में कोर्ट को देना चाहते हैं. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि दिशा रवि को लेकर हमारे पास पर्याप्त सामग्री है. दिशा ने टूलकिट में एडिट किया है. इनका सहयोगी शान्तनु दिल्ली आया था 20 से 27 तक दिल्ली में था. दिल्ली पुलिस के अनुसार वह यह देखने आया था कि तरह तमाम चीजो को अंजाम दिया जा रहा है. 

इन ख़बरों पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि इन लोगों जो प्लान था 26 जनवरी को वो सफल नही हुआ, अगर ऐसा होता तो स्थिति भयानक होती. इनका मकसद था कि पुलिस हिंसा के दौरान अपना आपा खोकर किसानों पर ज्यादा से ज्यादा बल का प्रयोग करती जिसमे अगर किसान ज़ख्मी होते तो बाद में सोशल मीडिया स्ट्रोम के जरिये अफवाह फैलाकर माहौल खराब किया जाता. उन्होंने बताया कि कनाडा का वैंकुवर शहर खालिस्तान मुवमेंट का एक प्रमुख सेंटर है. दिल्ली पुलिस के अनुसार जब दिशा से पूछताछ हुई तब उसने टूलकिट और वॉट्सऐप ग्रुप के बारे में कहा कि इसे इसके बार मे कुछ नहीं पता है.

दिल्ली पुलिस के अनुसार सिख जस्टिस फाउंडेशन ने दिशा जैसे चेहरे को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया. टूलकिट पीजेएफ (पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन) की मदद से ही तैयार हुई. दिशा ने ग्रेटा को टूलकिट दी और फिर इसे डिलीट करने के लिए भी कहा, इसका मतलब है कि दिशा को हर बात की जानकारी थी. दिशा ने पीजेएफ के साथ हुई चैट को मोबाइल से डिलीट किया था. उन्होंने संवेदनशील सामग्री हटाकर ग्रेटा को नई टूलकिट दी. उन्होंने कोर्ट में कहा कि शांतनु और दिशा चैट में इस पर चर्चा कर रहे हैं कि किसानों के मुद्दे पर ग्रेटा को कैसे प्रभावित किया जाए.  

Leave a comment

Your email address will not be published.