त्रिस्तरीय चुनाव सम्पन्न होने के बाद यूपी में ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के लिए सरगर्मीयाँ तेज हो गई है। आपको बता दे की इस चुनाव को कोरोना महामारी के बढ़ते मामलो को देखते हुए रोक लगा दिया गया है। लेकिन प्रत्याशी कहा मानने वाले हैं, जीतने के लिए हमेशा जोर जबरजस्ती अजमाने में लगे रहते हैं।
कुछ ऐसा ही मामला बासगांव ब्लॉक के एक छोटे से ग्राम रतसही के बीडीसी प्रत्याशी के साथ घटा है।

बीडीसी प्रत्याशी इंद्रावती देवी

बासगांव ब्लाक प्रमुख पद के प्रत्याशी मनीष सिंह पुत्र वीर बहादुर सिंह वार्ड नं 12 ने बांसगांव ब्लाक के अंतर्गत वार्ड नं 43 से निर्वाचित महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य इंद्रावती देवी पत्नी शिव चरन पाल के घर 8/5/2021के रात मनीष सिंह अपने समर्थक के साथ आकर जोर जबरदस्ती से इंद्रावती देवी का निर्वाचित प्रमाण पत्र छीन कर उठा ले गया और जाते समय दरवाजे पर अपना चेक फेक दिया।

आरोपी मनीष की तस्वीर

आपको बता दे की इंद्रावती देवी के घर घटना के वक्त कोई पुरुष मौजूद नहीं था। सुबह जब इंद्रावती देवी के पति घर पहुंचते हैं तब जाकर उन्हें इस मामले का पता चला। उसके बाद मनीष सिंह को फ़ोन किया की आप अपना चेक लेकर जाइए और हमारा प्रमाण पत्र वापस करिए। लेकिन दबंग प्रमुख प्रत्याशी ने देने से मना कर दिया।

थक हार कर इंद्रावती देवी ने खजनी थाना प्रभारी को शिकायत पत्र देकर अपने निर्वाचित प्रमाण पत्र की वापसी और कार्यवाही की मांग की है। इसके पहले भी ग्राम भूसवल के निर्वाचित बीडीसी जय प्रकाश पुत्र रघुनाथ के घर 17500 रूपया फेक कर निर्वाचन प्रमाण पत्र छीन लिया गया था। बीडीसी ने प्रभारी बासगाव को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई गई थी। जब बासगांव प्रभारी हरकत में आए तो भूसवल के पीड़ित बीडीसी को उनका प्रमाण पत्र मिला।

प्रार्थना पत्र


अब सवाल है कि निर्वाचित बीडीसी के सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी। लेकिन अब सवाल ये है की ग्राम रतसही के बीडीसी को खजनी पुलिस निर्वाचन प्रमाण कब दिलाती है। वही दूसरी तरफ जहा योगी सरकार ये दावा कर रही है की चुनाव में हेरफेर करने वालों पर कार्यवाही की जाएगी, लेकिन इस मामले पर इतना चूपी क्यो है।

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