Real Facts: चींटी एक ऐसा ज़ीव या कह ले एक ऐसी किटानु जो दिखने में तो बहुत छोटी होती है लेकिन इसके कारनामे बड़े-बड़े होते हैं. एक कहावत है जिसमें कही जाती है कि एक चींटी एक विशाल हाथी को भी हरा सकता है. लोग इसे मोटिवेशन (Motivation) के तौर पे भी इस्तमाल करते हैं कहते हैं कि अगर एक चींटी एक हाथी के नाक में धुस गई तो उसे अस्त प्रस्त कर देती है. और ये एकता कि भी प्रतिक होतीं हैं क्योंकि ये जब भी कोई काम करने जाती हैं तो एक साथ ही जाती हैं- आज हम आपको इसी छोटी चींटीयों की अनसूनी कहानी बताऐगे.- आख़िर ये चींटीयॉ आती कहॉ से हैं इनकी प्रजाति क्या हैं ये कब तक जिंदा रहती हैं-

चींटी फ़ोरमिसिडाए (Formicoidea) नामक कुल से आती हैं और इन्ही के कुल से मधुमक्खी में भी आती है यानी कि कह सकते हैं कि चींटी और मधुमक्खी एक ही वंशज के हैं. पूरी दुनिया में चीटियों की 1200 से अधिक जातियां पायी जाती है और ये अपने वजन का 20 गुना वजन तक उठा सकती है.
इन चीटियों के कान नहीं होते लेकिन जमीन पर हो रहे कम्पन को अपने पैरों से अनुभव कर लेती है फिर आगे चलती है. इनमें से ही कुछ रानी चींटी होती है जो कई सालो तक जीवित रहती है और करोडो बच्चे पैदा करती है. ये अपनी रानी को शायद ही कभी बदलते होंगे क्योंकि इनकी एक ही रानी हमेशा रहती हैं और इनमें जो श्रमिक चीटियॉ होती है वो बच्चे पैदा नहीं कर सकती हैं. जब ये चीटियां लड़ाई करती है तो सामान्य तौर पर लड़ने वाले में से किसी एक चींटी की मौत पक्की होनी ही है. जब चीटियां खाने की खोज में निकलती है तो अपने पीछे फेरोमोन (Pheromone) नामक कैमिकल छोड़ते जाती है , ताकि वे  जान सके की वे कहाँ है और वापस कैसे जाना है ?

पंख वाली चींटी..

इसमें जो रानी चीटियॉ होती हैं उनके पंख भी होते है लेकिन वो इनका इस्तमाल हमेशा नहीं करती हैं जब उन्हे रहने के लिए किसी नई जगह पर जाना होता है यानी की नया घर नया घोसला बनाना होता है तो वे अपने नए घोसलें तक उड़ कर जाती हैं. आपको यह जान कर काफी आश्चर्य होगा लेकिन चीटियों के फेफड़े नहीं होते, अब प्रशन आता है कि वे ऑक्सीजन (Oxygen) कैसे लेते हैं, दरअसल उनके पुरे शरीर में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिनसे ऑक्सीजन उनके अंदर प्रवेश करती है , और इन्ही छिद्रों के मदद से कार्बन डाइ ऑक्साइड (Carbon dioxide) बाहर निकलती है. इन चींटीयों की जान इनकी रानी में बसती है क्योंकि जब चीटियों की रानी मर जाती है तो घोसला केवल कुछ ही महीने तक जीवित रहती है. इसके बाद पुरी धोसला खत्म हो जाता है और सारी चींटीयॉ मर जाती हैं.

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